गुरु तेग़ बहादुर का जीवन परिचय | Guru Tegh Bahadur Biography in Hindi

गुरु तेग़ बहादुर का जीवन परिचय | Guru Tegh Bahadur Biography in Hindi:- दोस्तों, भारत में अनेक धर्मों के लोग रहते है। इसीलिए भारत विविधता में एकता वाला देश माना जाता है। भारत सभी धर्मों का जो सामंजस्य है, वह कहीं और देश में आपको नही मिलेगा।

भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सभी प्रकार के धर्मों के लोग रहते है। आज हम एक ऐसे इंसान की बात करने जा रहे है। जो मानवता, सत्यता व बलिदानता का प्रतीक है। जी हाँ दोस्तों, हम बात कर रहे है सिक्ख गुरु तेग़ बहादुर जी की।

तो दोस्तों यह आर्टिकल थोड़ा लम्बा हो सकता है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप इसे पूरा जरूर पढ़ियेगा। इसमें आपको बहुत कुछ अच्छी-अच्छी जानकारियां व संदेश मिलेंगे। तो चलिये शुरू करते है।

गुरु तेग़ बहादुर का जन्म व प्रारम्भिक जीवन-यात्रा (Guru Tegh Bahadur Biography in Hindi)

दोस्तों, गुरु तेग़ बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल को सन 1621 ईस्वी में पँजाब के अमृतसर नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम गुरु श्री हरगोविंद साहिब तथा माता का नाम नानकी था। इनके पता श्री हरगोविंद साहिब सिक्ख धर्म के 6वें गुरु थे।

8वें सिक्ख गुरु हरिकृष्ण राय जी असमय मृत्यु हो जाने के कारण लोगों के मतों के द्वारा ये 9वें सिक्ख गुरु चुने गए। इन्होंने ही आनंदपुर साहिब का निर्माण करवाया था। इसके बाद ये वहीं पर रहने लग जिस थे।

उनका बचपन का नाम त्यागमल था। मुग़लों के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मिलकर वीरता का परिचय दिया। उनकी वीरता ने जनके पिता को बहुत प्रभावित किया।

बाद में उनके पिता ने उनका नाम त्यागमल से तेग़ बहादुर रख दिया। युद्ध में हुए भीषण खून-खराबे से गुरु तेग़ बहादुर साहिब का मन विचलित हो गया।

इससे उनका मन आध्यात्मिक चिंतन की तरफ हुआ। उन्होंने लगातार 20 वर्षों तक बाबा बाकल नामक स्थान पर साधना की। गुरु तेग़ बहादुर बाल्यकाल से ही ध्यान-साधना किया करते थे। वह दिन का अधिकतर समय साधना में ही लीन रहते थे।

गुरु तेग़ बहादुर 5 भाइयों में सबसे छोटे थे। सिक्ख गुरु हरकिशन साहिब ने अपनी मृत्यु के समय कहा था कि अगले सिक्ख गुरु बाबा बाकल होंगे। गुरु तेग़ बहादुर साहिब बाकल में ही रहते थे।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब ने अपने सम्पूर्ण जीवन में प्रथम सिक्ख गुरु नानक देव के बताये रास्ते पर चलते रहे। उनके द्वारा लिखे गए 115 ग्रन्थ, गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित है।

सिक्ख धर्म में गुरु तेग़ बहादुर जी का अद्वित्य स्थान है। गुरु तेग़ बहादुर जी ने धर्म, मानवता व सत्यता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। इसलिए उनका सिक्ख धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब को हिन्द-ए-चादर के नाम से भी जाना जाता है। कश्मीर के पंडितों की रक्षा हेतु बहादुर साहिब शाहिद हो गए थे। इनकी मृत्यु 11 नवंबर, सन 1675 को दिल्ली के चांदनी चौक में हुई थी।

उन्होंने कश्मीरी पंडितों और दूसरे हिन्दूओं को जबरदस्ती मुसलमान बनाने का विरोध किया। सन 1666 ईस्वी में पटना साहब में उनके घर पुत्र का जन्म हुआ हुआ। जो बाद में गुरु गोविंद सिंह के नाम से प्रसिद्ध हुए।

सन 1675 ईस्वी में गुरु तेग़ बहादुर साहिब ने इस्लाम धर्म मानने से मना कर दिया था। इस कारण मुग़ल शासक औरंगजेब ने इस्लाम धर्म न मानने के लिए गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी का कत्ल कर दिया था।

गुरुद्वारा शीश गंज साहिब व गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब नामक स्थान पर गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी की मृत्यु हुई थी तथा यहीं पर इनका अंतिम संस्कार हुआ था।

गुरु तेग़ बहादुर का बलिदान धर्म पालन के लिए नही बल्कि सम्पूर्ण मानवीय सांस्कृतिक विरासत के लिए था। इसलिए उनका बलिदान एक साहसिक अभियान था।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब के कार्य

दोस्तों, वैसे तो गुरु तेग़ बहादुर साहिब ने अपने जीवनकाल में बहुत से प्रभावी कार्य किये है। अपितु यह कहना गलत नही होगा कि उन्होंने अपने जीवन में सिर्फ मानवता के कल्याण के लिए ही कार्य किये है।

गुरु साहिब जी ने धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कईं स्थानों पर भ्रमण किया। उन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में आनंदपुर, किरतपुर, रोपड़, सैफाबाद, खदल आदि स्थानों की यात्राएं की। गुरु साहिब सभी जगहों पर लोगों को मानवता, सत्यता के पाठ पढ़ाया करते थे। वे सभी को साथ रहने का संदेश देते थे।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी ने कुरुक्षेत्र में भी धर्म के मार्ग पर चलने का उपदेश लोगों को दिया। इसके बाद वह कडमानकपुर भी गए। वहाँ उन्होंने मलूकदास नामक साधु के कष्ट का निवेदन करके उज़क उद्धार किया।

इसके बाद गुरु साहिब बनारस, पटना और असम आदि जगहों पर भी गए। वहां भी उन्होंने लोगों को अपने उपदेश के माध्यम से जाग्रत किया।

गुरु तेग़ बहादुर साहिब जहाँ भी जाकर उपदेश देते थे। वहां उनके अनुयायी बन जाते थे। गुरु साहिब ने अपने सम्पूर्ण जीवन परम्परागत रूढ़िवादी धारणाओं तथा अंधविश्वासों का विरोध किया।

प्रथम 5 सिक्ख गुरुओं की तरह गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी ने भी शबद का रहस्य जाना था। उन्होंने भी कईं गीत लिखे। कहा जाता है कि जब गुरु साहिब को मुग़ल शासक औरंगजेब ने जेल में कैद किया था। उस समय उन्होंने पश्चिमी शक्तियों के आने के बाद मुग़ल सम्राज्य के पतन की भविष्यवाणी की थी।

तो दोस्तों, यह थी सिक्खों के नौंवे गुरु श्री गुरु तेग़ बहादुर साहिब जी की जीवनी (Guru Tegh Bahadur Biography)। आशा करता हूँ कि सिक्ख धर्म के 9वें गुरु श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के बारे में दी गयी जानकारी आप सभी को पसंद आयी होगी।

अंत में दोस्तों में सिर्फ यही कहना चाहता हूँ कि गुरु तेग़ बहादुर जी ने जो भाईचारे, मानवता व धर्म की पहल शुरू की थी उस पहल को हम सभी को निरंतर जारी रखना है।

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